काज़िम सिद्दीक़ी ने नमाज़े जुमा के ख़ुतबों में चार नवम्बर को विश्व साम्राज्य से संघर्ष के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर देश भर में निकाली जाने वाली रैलियों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि पिछले चालीस साल में अमरीका ने इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था से दुश्मनी में हरसंभव हथकंडा अपनाया है और हरसंभव साज़िश रची है। उन्होंने ईरान व गुट पांच धन एक के बीच वार्ता और परमाणु समझौते पर दस्तख़त की याद दिलाते हुए कहा कि इस समझौते का नतीजा क्या हुआ? क्या प्रतिबंध ख़त्म हो गए? न केवल यह कि प्रतिबंध ख़त्म नहीं हुए बल्कि नए प्रतिबंध भी लगा दिए गए।
तेहरान के अस्थायी इमामे जुमा ने इस बात पर बल देते हुए कि आर्थिक युद्ध में सक्षम व योग्य युवाओं और मीज़ाइल को देश के सम्मान का साधन बनाने वाले जवानों को मैदान में आने का अवसर दिया जाना चाहिए, कहा कि आर्थिक युद्ध के मैदान में क्रांतिकारी और काम करने वाले युवाओं को आने दिया जाना चाहिए। काज़िम सिद्दीक़ी ने इसी तरह अमरीका से वार्ता के बारे में ईरान के अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि जो चीज़ समस्याओं में बढ़ोतरी का कारण बनती है, वह दूसरों से आस लगाना और अन्य देशों की आशा में रुका रहना है।